Made by History competition: A chance to celebrate

Saturday, August 04, 2018 1:42:12 PM






Bachendri Pal Biography in Hindi विश्व की सबसे उची चोटी माउंट एवेरस्ट पर चढाई करने वाले भारतीयों में बछेंद्री पाल Bachendri Pal का नाम भी आता है को एवरेस्ट पर फतेह पानी वाली पहली भारतीय महिला है | वो ना केवल एक बार बल्कि दो बार माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहरा चुकी है | एक साधारण परिवार में जन्मी इस आत्मविश्वासी और बहादुर महिला की जीवनी से आज आपको रूबरू करवाते है | Bachendri Pal बछेंद्री पाल का जन्म 24 मई 1954 को भारत के उत्तरांचल जिले के गढ़वाल जिले के एक छोटे से गाँव नकुरी में हुआ था | उनके पिता का नाम किशनपाल सिंह और माता का नाम हंसा देवी था | किशनपाल सिंह एक साधारण व्यापारी थे जो अपने पांच बच्चो के पालन पोषण करने के लिए गेहूचावल और किराणे के सामान खच्चरों पर लादकर तिब्बत ले जाते थे और वहा से तिब्बती सामान लाकर गढ़वाल में बेचते थे | उस समय भारत के चीन के साथ अच्छे सम्बन्ध थे इसलिए तिब्बत आने जाने में कोई परेशानी नही होती थी | जब भारत के साथ चीन की लड़ाई हुयी उसके बाद बछेंद्री पाल के पिता का व्यवसाय ठप्प हो गया और वो अपने परिवार के साथ आकर काशी बस गये | Bachendri Pal बछेंद्री पाल बचपन से ही बहुत चुस्त थी जो पढ़ाई के साथ साथ खेलकुद में भी अव्वल रहती थी | उनको पर्वतारोहण का शौक बचपन से था जिसके कारण केवल 12 वर्ष की उम्र में स्कूल पिकनिक के दौरान 13,123 फीट की उचाई पर आसानी से चढ़ गयी थी | जब वो अपने सहपाठीयो के साथ चोटी पर पहुची तो मौसम अचानक खराब हो गया और उस दल को उस चोटी पर ही रात गुजारनी पड़ी | बिना भोजन पानी के उस रात को बछेंद्री पाल कभी नही भूल पायी और उसी दिन से उसके मन में पर्वतों के प्रति प्रेम ऑर ज्यादा बढ़ गया | बड़ी मुश्किल से उन्होंने मैट्रिक उच्च माध्यमिक शिक्षा उत्तीर्ण की | अब उनके माता पिता Bachendri Pal बछेंद्री पाल को ओर ज्यादा पढ़ाने के पक्ष में नही थे लेकिन महाविध्यालय के प्राचार्य के कहने पर बछेंद्री पाल ने कॉलेज में दाखिला ले लिया | अब कॉलेज ने उन्होंने शूटिंग भी सीखी और एक शूटिंग प्रतियोगिता में भी विजय प्राप्त की | उसके बाद बछेंद्री पाल ने स्नातकोत्तर उअर बी.एड. की परीक्षा भी उतीर्ण की | अब Bachendri Pal बछेंद्री पाल पर्वतारोही बनना चाहती थी लेकिन घरवालो को उसका पर्वतारोही बनना बिक्लुल पसंद नही था क्योंकि वो चाहते थे कि वो किसी स्कूल में शिक्षिका बन जाए फिर उसकी शादी करा दी जाए | लेकिन बछेंद्री पाल कहा मानने वाली थी और बड़ी जिद्दी थी इस कारण बछेंद्री पाल ने उत्तराकाशी के नेहरु इंस्टिट्यूट ऑफ़ माउंटेनियरिंग में प्रवेश ले लिया | उस प्रशिक्ष्ण केंद्र में उनका प्रदर्शन इतना अच्छा था कि उनको केंद्र का सर्वश्रेष्ठ छात्रा घोषित किया गया | इंस्टीट्यूट वाले जानते थे कि इस लडकी में एवरेस्ट में चढने की काबिलियत है और उसे इसके योग्य मानते थे | 1982 में ही उन्होंने संस्थान में प्रशिक्ष्ण के दौरान 21,900 फीट उचे गंगोत्री शिखर और 19,091 फीट उचे रदूगरिया शिखर पर सफलतापूर्वक आरोहण किया था | उनकी इसी काबिलियत के कारण उनको National Adventure Foundation (NAF) में instructor की नौकरी मिल गयी | वहा पर वो महिलाओं को पर्वतारोहण का प्रशिक्ष्ण देने का काम करती थी | इस तरह के पर्वतारोहण प्रशिक्ष्ण के दौरान Bachendri Pal मानसिक रूप से एवरेस्ट चढने के लिए तैयार हो गयी थी | सन 1984 में भारत ने “एवरेस्ट-84 ” नामक एवरेस्ट पर चढने वाले अभियान दल में Bachendri Pal का चयन कर लिया गया जिसमे ग्यारह पुरुष और छ: महिलाओ का दल था | जिस दिन ये दल पर्वतारोहण के लिए नेपाल से रवाना हुआ तब अखबारों में इसकी खूब चर्चा हुयी थी क्योंकि इस दल में सबसे प्रशिक्षित पर्वतारोहीयो को भारत भेज रहा था | अब काठमांडू पहुंचने के बाद ये दल माउंट एवरेस्ट पर चढाई करने के लिए रवाना हुआ | एवरेस्ट को पहली बार अपनी आँखों से Author and editor William McPherson describes descent into poverty - Los Angeles Times Bachendri Pal को अपने सपनों की उडान दिखाई दी जिसका सपना वो कई वर्षो से देख रही थी | 1984 में मई के महीने में दल ने Fans can decide Minecrafts newest mob during the MineCon Earth livestream this weekend पर चढाई शुरू की The Luxury Hotels America’s Wealthy and Powerful Call Home 15-16 मई को वो दल 24 हजार फीट की उचाई पर पहुच गया | अब 24000 फीट चढ़ेने के बाद दल ने टेंटो में आराम करने का विचार किया और उसी रात एक जोरदार धमाका हुआ | Bachendri Pal बछेंद्री पाल और दल के साथियो ने जब बाहर The heartbreaking 000 call made by a five-year-old girl in Queensland देखा तो उनका पूरा शिविर चारो ओर बर्फ से ढक गया था क्योंकि शिविर के उपर से एक हिमखंड टूटकर उनके उपर गिर गया था | अब पर्वतारोहियों ने चाकुओ से बर्फ को काट काटकर बाहर निकलने का रास्ता बनाया | इस घटना में दल के कई लोग घायल हो गये थे जिनको वापस नीचे बेस कैंप में पहुचाया गया | अब Bachendri Pal बछेंद्री पाल उस घटना से सुरक्षित थी केवल सर में हल्की चोट आयी थी फिर भी उसने विपदाओ से बिना डरे आगे बढ़ने का फैसला लिया | अब 22 मई 1984 को नये पर्वतारोही दल में शामिल हो गयी क्योंकि पुराना दल वापस बेस कैंप जा चूका था | इस नये दल में बछेंद्री पाल एकमात्र महिला थी जो बड़े जोश से आगे बढ़ रही थी | अब 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही बर्फीली हावाओ में भी उन्होंने सीधी चढाई करना जारी रखा | अब तापमान भी गिरकर शून्य से 40 डीग्री कम हो गया था फिर भी बछेंद्री पाल उस दल के साथ हिम्मत से आगे बढ़ रही थी | 23 मई 1984 को दोपहर एक बजकर सात मिनट पर बछेंद्री पाल ने एवरेस्ट चोटी पर पहुचकर एक इतिहास रच डाला और एवरेस्ट पर चढने वाली पहली भारतीय महिला का ख़िताब पा लिया जिसे कोई नही तोड़ सकता था | उस शिखर पर एक समय में केवल दो व्यक्ति ही रुक सकते थे क्योंकि चारो ओर हजारो फीट गहरी खाई थी और थोड़ी सी चुक पर जान जा सकती थी | अब Bachendri Pal बछेंद्री पाल ने बर्फ में अपनी कुल्हाडी गाडकर अपने आप को स्थिर किया और घुटनों के बल बैठकर ईश्वर को अपना सपना पूरा करने के लिए धन्यवाद दिया | अब उसने अपने बैगपैक में से दुर्गा माता की तस्वीर और हनुमान चालीसा निकली और उन्हें बर्फ पर रख दिया | इस तरह एवरेस्ट का शिखर चूमने वाली पहली भारतीय और विश्व की पांचवी महिला बन चुकी थी | उनकी इस उपलब्धि के लिए भारत के राष्ट्रपतिप्रधानमंत्री और अन्य चर्चित लोगो ने उन्हें व्यक्तिगत बधाई दी | अब माउंट एवेरेस्ट पर चढने के बाद भी वो रुकी नही और 1993 में एक बार फिर Bachendri Pal बछेंद्री पाल के नेतृत्व में भारत व नेपाल के महिला पर्वतारोहियो के साथ एक बार फिर एवरेस्ट पर विजय प्राप्त की | इस टीम में उन्होने 18 पर्वतारोहियों को शिखर तक पहुचाया था Made by History competition: A chance to celebrate केवल 7 महिलाये थी जो बहुत आस्चर्य की बात थी | उसके बाद उन महिलाओं ने बछेंद्री पाल के नेतृत्व में The Great Indian Women’s Rafting Voyage – 1994 और First Indian Women Trans-Himalayan Expedition – 1997 का निर्माण किया जिन्होंने Rafting और Trekking के कई Adventurous कार्य किये |उसके बाद Bachendri Pal बछेंद्री पाल ने साहस और रोमांच से भरी कई गतिविधिया का नेतृत्व किया | वर्तमान में वो टाटा स्टील कम्पनी में नये युवक-युवतियों को पर्वतारोहण का प्रशिक्ष्ण देने लग गयी | तो Bachendri Pal बछेंद्री पाल से हमे ये शिक्षा मिलती है कि महिलाये भी किसी भी काम में पुरुषो से कम नही है बस आगे बढ़ने की देर है | मित्रो अगर. आपको Bachendri Pal Biography in Hindi पसंद आयी हो तो Can John Lasseter Ever Return to Disney? अपने सुझाव कमेंट में जरुर देवे | इसी के साथ एक बार फिर “नारी शक्ति को सलाम और जय हिन्द “

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